हिन्दी कहानियाँ
मेरे गुलाब, मेरे पड़ोसी-The Rose
Saturday, February 9th, 2008मेरे आँगन में पहले इक्का-दुक्का फिर सहसा ढेरों गुलाब खिल उठे. नया-नया घर था. बगीचें में गुलाब न हों तो बात जमती नही. अभी यह नजारा दो-चार दिन ही चला था कि फूल गायब होने लगे. हप्ते भर की चौकीदारी के बाद मैंने एक दिन भोर की बेला में पडोंस की कच्ची बस्ती में रहने […]
डाकू रत्नाकर -daaku ratnakar
Monday, January 7th, 2008
प्राचीन काल की बात है एक वन में रत्नाकर नाम का डाकू रहता था !वह बडा निर्दयी था राह चलते लोगो को लूटना और मरना उसका पेसा था !रत्नाकर की दुष्टता के कारण उस वन के निवासी बडे दुखी थे !
एक दिन नारद मुनि कुछ मुनियों के उस वन से गुजर रहे थे !रत्नाकर उन्हें […]