ग़ज़ल और शेरो-शायरी

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संदेशा-दुखती हुई आंखों का

Saturday, March 15th, 2008

गुल -ऐ -उम्मीद  की  टहनी  की  पेशानी  से ,
किस्मत  के  सितारे  की  तरह  टूटते
ऐ आखरी  पत्ते ….
मुझे  तुम  को  तुम्हारी  मौत  का  परसा
भरी  आंखों से  देना  है
मगर , इक  दर्द  मेरा  भी ….
अगर  तुम  सुन  सको  तो….?
एक  लम्हे  को  सुनो …
तुम्हारा  भी  सफर  उस  सिम्त  है  अब  से
जहां  से  वापसी  मुमकिन  नही  होती
जहां जश्न -ऐ […]

मोहब्बत के सफर में कोई रास्ता नही देता

Saturday, February 9th, 2008

चराग अपने थकान की कोई सफ़ाई न दे
वो तीरगी है के अब ख्वाब तक दिखाई ना दे
बहुत सताते हैं रिश्ते जो टूट जाते हैं
खुदा किसी को भी तौफीके -आशनाई […]

ख़ुद को मेरा दोस्त बनाने की जरूरत क्या है

Wednesday, February 6th, 2008

ख़ुद को मेरा दोस्त बनाने की जरूरत क्या है ,
दोस्त बनके दगा देने की जरूरत क्या है ,
अगर कहा होता तो हम ख़ुद ही चले जाते ,
यू आपको चेहरा छुपाने की जरूरत क्या है ,
सोचा था रहेंगे एक घर बनाके बड़े सुकून से ,
न मिल सका सुकून तो महलों की जरूरत क्या […]

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

Thursday, January 10th, 2008

लोग हर मोड़ पे रुक रुक के संभलते क्यों हैं.
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं.
मैं न जुगनू हूँ दिया हूँ न कोई तारा हूँ
रौशनी […]

मेरे तहरीर की ज़द में अभी तो..

Saturday, January 5th, 2008

मुझे जो कुछ भी कहना था अभी मैं कह नही पाया,
मेरे तहरीर की ज़द में अभी तो कुछ नही आया,
अभी भी करब लिखना है जिसे महसूस करता हूँ
अभी वो ख्वाब लिखने हैं जो आँखों में पलते हैं ,
मुझे उनको भी लिखना है जिन्हें मैं ढूंढ न पाया
अभी वो लोग लिखने हैं जो खो कर हाथ […]

तेरे बगैर ये अब जिंदगी कहाँ गुज़रे.

Saturday, January 5th, 2008

मैं सुन के उसकी सब बातें ,
फ़क़त इतना ही कहता हूँ
खफा होना ,
मना लेना ,
ये सदियों से रवायत है
मोहब्बत की अलामत है,
गिले शिकवे करो मुझ से
तुम्हें जानम इजाज़त है
मगर इक बात मेरी भी याद रखना !
कभी ऐसा भी होता है
हवाएँ रुख बदलती हैं
खिजाएँ लौट आती हैं
खताएं हो भी जाती हैं
खफा होना भी मुमकिन है
खाता होना […]

कहा था ना !

Saturday, January 5th, 2008

कहा था ना !
मुझे इस तरह
सोते हुए मत छोड़ कर जाना
मुझे बेशक जगा देना
बता देना …
मोहब्बत के सफर में
साथ मेरे चल नहीं सकतीं
जुदाई में हिज्र में
साथ मेरे जल नहीं सकतीं
तुम्हें रास्ता बदलना है
मेरी हद से निकालना है
तुम्हें किस बात का डर था
तुम्हें जाने नहीं देता ??
कहीं पर कैद कर लेता ??
अरे पगली !!!!!
मोहब्बत की तबियत
ज़बरजस्ती […]

किसे पुकारें हम इस हुजूम -ऐ -गम में

Saturday, December 29th, 2007

 
किसे पुकारें हम इस हुजूम -ऐ -गम में.
के सब ही हमारे आज़माए हुए हैं.
तुम ही ने हमें कर दिया तनहा
वरना हम तो ताल्लुक निभाएं हुए हैं
धीमे धीमे आंसू दिल से गिरते.
के हम अपना गम सब से […]

उल्फत का अधूरा अफसाना

Monday, December 24th, 2007

उल्फत का अधूरा अफसाना कुछ भूल गए कुछ याद भी है,
साहिल से लहर का टकराना कुछ भूल गए कुछ याद भी है.
तेरे अहदे वफ़ा ने काम किया मेरा शौके जूनून बढ़ता ही गया,
अफ़सोस बुलंदी पर ला कर खुद तुने मुझको गिरा दिया,
लिपटा के गले यूं ठुकराना कुछ भूल गए कुछ याद भी है.
उल्फत का […]

क्या प्यार में ऐसा होता है ?

Sunday, December 23rd, 2007

क्या प्यार में ऐसा होता है ????
के जिससे दिल चाहे उसपे मर जाने को.
दिल चाहता है उसके आंसू पी जाने को,
दिल चाहता है उसके हर गम मिटा देने को,
दिल चाहता है उसको हर पल मुस्कराता हुआ देखने को.
दिल चाहता है उसपे ज़िंदगी लुटा देने को,
दिल चाहता है उसका हाथ पकड़ के उड़ जाने को,
दिल चाहता […]

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